मिडल क्लास साइको किलर
विकाश सिंह एक मध्यम वर्गी लड़का था ,जो की काफी सीधा साधा था । जब वह स्कूल जाता तो लोग उसे पेंसिल कहकर चिढ़ाते थे ,जब वह इसकी शिकायत टीचर से करता तो टीचर उसे यह कह देती- गलती तेरा है बेटा तू ढंग से खाता क्यू नही ।यह कहकर उसकी बातो को टाल दिया जाता जब वह स्कूल से जाता तो उसकी मां उसे खूब लाड प्यार करती थी । विकाश का उसके मां के अलावा इस दुनिया में और कोई नही था ।उसकी मां ही उसकी दुनिया थी ।
उस दिन रविवार का दिन था। उसकी मां उसे सर्कस दिखाने ले गई जहां उसे जोकर का किरदार काफी भा गया घर आके वो जोकर के बारे में ही सोचता रहा । जोकर उसे पूरी तरह भा गया था उस जोकर के किरदार ने उसके अंदर एक अलग ही जगह बना ली थी ।वह अपनी मां से हमेशा कहता था ।मां मैं बड़ा होकर जोकर बनूंगा ।यह सुन उसकी मां हस देती और कहती तुझे जो बनना है,बन जाना बेटा तेरी खुशी में ही मेरी खुशी है । फिर वो अगले दिन स्कूल गया,वहा भी उसे बच्चे चिढ़ाते ही रहते थे । और वो कुछ भी नही कर पता था ,बेचारा करे भी तो क्या करे टीचर सुनती नही और अब विकाश सुनना नही चाहता । अब विकाश को बहुत गुस्सा आने लगा उसने अपनी मानसिकता बना ली की ये दुनिया उसे जीते जीते जी मारना चाहती है । जाहिर सी बात है ,अपने आप ऐसे मानसिकता आना मानसिक रोगी का ही लक्षण हो सकता है ।लोग उसके अंदर ही अंदर पल रहे गुस्से से अनजान थे ।एक दिन उसे बहुत ज्यादा चिढ़ाया जाने लगा जब वह टीचर के पास गया तो टीचर उसे ही डाटन लगी की तुम बार बार मेरे पास ही शिकायत लेके आते हो यह देख विकाश डर गया 17 साल की उम्र। में उसे इतना कुछ देखना पड़ रहा था कोई उसे पसंद नही करता था।उसका कोई दोस्त भी नही था , अपने अकेलेपन के कारण उसका गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था ।वह मारे गुस्से के दात पीसते पीसते घर गया ।अपना बस्ता भी पटक दिया यह देख उसकी मां ने उसे पूछा बेटा क्या हुआ ,विकाश रोते रोते कहने लगा मां मुझे कोई पसंद नही करता मेरा कोई दोस्त नहीं है ।यह देख मां रोने लगी और उसे गले लगा के चूमने लगी ।फिर अगले दिन विकाश ने ठान लिया अब वह स्कूल नहीं जाएगा ।उसकी मां ने जैसे तैसे उसे मनाया ,तब वह स्कूल जानें को तैयार हुआ । जाते गली के लड़के भी हसने लगे ।ये देख विकाश का गुस्सा सिर पर चढ़ गया,क्लास के लड़के बाद अब गली के लड़के भी उसके पतलेपन को देखकर चिढ़ाने लगे । दर असल विकाश बहुत ही पतला था ,उसका बॉडी ग्रोथ बाकियों के मुकाबले कम था,और उसे बहुत सी बिमारिया थी । दुख में बेचारा विकाश और पतला होता जा रहा था।लोग उसे बाकियों जैसा ट्रीट नही करते थे। उस दिन जब वह स्कूल गया उसकी टीचर ने उस डाट लगाई क्युकी उसके नंबर्स फर्स्ट सेमेस्टर में काफी कम आए थे। जब उसकी मां को स्कूल बुलाया गया तो उन्हें बहुत कुछ सुनना पड़ा। टीचर ने जब विकाश को मां को बहुत कुछ सुनाया तब विकाश सब देख रहा था उसका गुस्सा सिर पे चढ़ रहा था ।अब स्कूल का छुट्टी हुआ ,विकाश और उसकी मां परेशान थी । क्युकी अब स्कूल से विकाश की शिकायते आने लगी थी ।वो दोनो बस से घर जा रहे थे ,बस खाली थी । उसमे केवल 4 लड़के थे ,तब विकाश और उसकी मां ने देखा कि बस की गति तेज हो रही थी और यात्रियों को भी बस में नहीं बैठाया जा रहा था । ये देख विकास और उसकी मां डर गई ।तभी वो लड़के विकाश को मां की ओर बढ़ने लगे विकास डरने लगा वो उन लोगो को रोकने की कोशिश करता इससे पहले उसके सर पर रॉड से वार कर दिया गया अब विकाश बेहोश हो गया । जब वह उठा तो उसने देखा तो उसकी मां मृत पड़ी है, बस खाली है । ये देख विकाश का मुंह खुला का खुला रह गया उसे यकीन नही हुआ उससे उसकी मां छीन गई थी ।उसकी पूरी दुनिया छीन गई थी।वो बेहद रोने लगा । उसकी मां को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए दे दिया । अब विकाश का गुस्सा बढ़ने लगा उसने घर जाके अपनी आलमारी खोली जिसमे जोकर का ड्रेस रखा था ,जो उसने किसी खास मौके पर पहनने के लिए रखा था ।अब उसने उस ड्रेस को निकालकर पहन लिया फिर वह सबसे पहले अपने स्कूल टीचर के घर गया ,टीचर और उसके पति को तुरंत मौत के घाट उतार दिया । अब विकाश जब वहा से निकला तब उसे पता चला कि उसके मां के अपराधी पकड़े गए है ,और जेल में है ।
फिर वह जेल में जाके उन सब को मौत के घाट उतार दिया इस बीच उसके सामने जो कोई भी आया वह मारा गया । अब विकाश ने बहुत सी लाशे बिछा दी थी । फिर विकाश को गिरफ्तार किया गया ,लेकिन उसने कई लोगो का खून कर दिया था । लेकिन इसके पीछे वजह था हमारा समाज जिसने विकाश जैसे कुपोषित बच्चे को कभी बाकियों जैसा ट्रीट नही किया ।


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