चरवाहे का दुख

 आज हरिया बहुत परेशान था।वह सोच रहा था कि जब सब हर त्योहार में आराम करते है,या हर इतवार घर में रहते है ।टीवी देखते है ,कहानियां पढ़ते है ।पत्नी के साथ एवं परिवार के साथ सुखी जीवन व्यतीत करते है ।तो फिर हम चरवाहों का जीवन इतना निर्मम और स्थाई क्यू है।हमे क्यू रोज गाय,भैंस,बकरिया चराना पड़ता है ।ऊपर से शाम को आओ तो गाय के दूध दुहने पड़ते है।तब थोड़ा समय मिले तो उसमे खाना पीना सोना पड़ता है ,हमारे जीवन में सच कहे तो सुख है ही नही ,यह सोच हरिया परेशान था ।इसी बीच अब उसके पिता जी ने गाय चराने जाने को कहा हरिया डांट के डर से तुरंत गाय चराने निकला,इस बीच उसे स्कूल जाते बच्चे दिखे वह खुश हो गया उसे अपने बचपन के दिन याद आने लगे जब वह स्कूल में मस्ती करता था किंतु इस बीच वह रोने भी लगा यह सोचकर कि किस तरह उसे अपनी गरीबी के कारण स्कूल जाना छोड़ना पड़ा।उसने यह सोच कहा,खैर अब पछताए से होवत का जब चिड़िया चुग गई खेत।यह सोच हरिया काम में मन लगन लगा उस दिन गाय चराते वक्त वह अपने जीवन का तुलना दूसरो से करने लगा ,वह दिन रात यही सोच के दुखी रहता था कि क्यू उसे आराम नही मिलता क्यू उसे रोज गाय चराना पड़ता है ।आखिर क्यू उसके जीवन में सुख नहीं है ।धूप कड़ी होने के कारण हरिया जल्दी गाय चाराके आया शाम को वह दूध दुहने गया सब लोगो ने हरिया को डाटा क्युकी उस शाम उसने गायो को जल्दी घर ला दिया था ।जब वह दूध दुहने गया तो उसके गांव के मुखिया ने उसे धमकी दिया कि ऐसा अगर दोबारा हुआ तो वह उसे सजा के तौर पर पैसे दंड मन मांगेंगे।यह सुन हरिया ने तुरंत मुखिया से माफी मांगा और सोचने लगा एक तो मैं गरीब दो चार पैसे कमाने वाला ऊपर से उन पैसों को भी अगर दंड में देना पड़े तो बाबूजी नाराज़ हो जायेंगे ,और नतीजन मुझे घर से निकाल दिया जायएगा। फिर वह मुखिया से माफी मांग खसक लिया ।आज उसे सब लोगो ने बहुत डाटा क्युकी वह गायों को जल्दी घर ले आया था ,नतीजन सभी घरों से उसे डांट ही मिला।इस बीच वह घर में गया घर में तेल न होने  के कारण कुछ नही  बना था ,फिर वह घर जाके तेल  लेने गया दुकान दार ने तेल देने से मना कर दिया क्युकी पुराने पैसे बाकी थे ।हरिया मुंह लटकाय घर आया यह देख बाबूजी जान गए तेल नही मिला। फिर सभी लोगो ने उस दिन रूखा सूखा खाया और सो गए ।अगली सुबह हरिया के बाबूजी बोले अरे ओ हरिया जा दूध बेच आ घर में तेल नही है ।हरिया दूध बेचने निकला पहले वह प्लास्टिक की झिल्ली में दूध बेचता था किंतु प्लास्टिक की झिल्ली सरकार द्वारा बंद किए जाने पर लोटा पकड़ दूध बेचने निकल यह देख स्वच्छ भारत का सपना देखने वाले नागरिकों ने उसे पकड़ के खूब पीट दिया।


अब चारवाह काम करे तो भी कष्ट न करे तो भी कष्ट।

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